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Mppsc 3 marker hindi सर्वनाम

Mppsc 3 marker mppsc hindi सर्वनाम सर्वनाम से क्या आशय है, सर्वनाम के भेदों को उदाहरण सहित लिखिए? 2008 सर्वनाम के कार्य और भेद लिखिए? 200८ ऐसे विकारी शब्द जो संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किए जाते हैं सर्वनाम कहलाते हैं। भेद  पुरुष वाचक । में, तुम  निश्चयवाचक । यह, ये अनिश्चयवाचक । कोई, कुछ प्रश्नवाचक । क्या, कौन निजवाचक । अपना, अपने संबंधवाचक । जो, जैसा पुरुषवाचक सर्वनाम भेद के कितने भेद हैं, नाम लिखिए? २००९ ऐसे सर्वनाम जो स्त्री या पुरुष के स्थान पर प्रयोग किए जाते है पुरुषवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। भेद उत्तम पुरुष। में, हम  मध्यम पुरुष। तुम, आप अन्य पुरुष। वह, वे, ये

Mppsc 3 marker hindi संज्ञा

3 marker mppsc hindi संज्ञा संज्ञा के कितने भेद हैं, नाम लिखिए ? 2009,2017 किसी वव्यक्ति, स्थान, वस्तु, भाव आदि के नाम का बोध कराने वाले विकारी शब्दों को संज्ञा कहते हैं संज्ञा के भेद  व्यक्तिवाचक। राम, भारत, गंगा जातिवाचक। पुरुष, बकरी भाववाचक। लोभ, मोह, साहस समूहवाचक। संघ,परिवार, संसद द्रव्यवाचक। दूध, पानी भाववाचक संज्ञा के भेद को बताइए? किसी व्यक्ति या वस्तु के  गुण धर्म, भाव का बोध कराने वाले शब्द भाववाचक संज्ञा कहलाते हैं। भेद  संज्ञा से । लड़कापन सर्वनाम से । अपनापन विशेषण से । कठोरता क्रिया से । दौड़ अवयव से । सामीप्य

mppsc 100 परिभाषिक शब्द mppsc 2015 से 2019 पूछे प्रश्न

100 महत्त्वपूर्ण परिभाषिक शब्द Mppsc में पूछे गए 2015 से 2019 तक परिभाषिक शब्द प्रश्न Commmisioner  आयुक्त Justice न्यायमूर्ति Appendex परिशिष्ट  Body निकाय Registration पंजीकरण Secretary  सचिव Accused अभियुक्त Agenda कार्यवृत Amendment संशोधन Amended संशोधित Writ याचिका Trustee  न्यासी Adminstration प्रशासन Foot note पाद टिप्पणी  Gazzete राजपत्र Manifesto घोषणा पत्र Veto विशेषाधिकार Grant अनुदान Affidavit शपथ पत्र Guarantee प्रत्याभूति Bequest वसीहत Vague अस्पष्ट Verdict अभिमत Visa पार पत्र Vigilence सतर्क Specimen नमूना Statement अभि कथन Search warrant तलाशी अधिपत्र Stay order स्थगन आदेश Section धारा परिभाषिक शब्द mppsc  Evidence साक्ष्य Act अधिनियम Audit लेखा परीक्षा Auditor लेखा परीक्षक Allowance भत्ता Accused अभियुक्त Allotment आवंटन Adhoc तदर्थ Assent अनुमति Consent सहमति Bench न्यायपीठ Bonus अधिलाभांश Bond अनुबंध Bid नीलामी Culprit अपराधी Concise संक्षेप Customs सीमा शुल्क Capital sentence मृत्यु दंड Convention रुढ़ी Dissolution विघटन Duplicate अनुलि...

koutilya ke saptang shidhant in hindiकौटिल्य का सप्तांग सिद्धांत

कौटिल्य का सप्तांग सिद्धांत महान राजनैतिक विचारक कौटिल्य ने अपनी पुस्तक अर्थशास्त्र के अध्याय 6 में सप्तांग सिद्धांत का वर्णन किया है। राज्य की उत्पति के संबंध में वह सामाजिक समझौता के सिद्धांत का समर्थन करते है।  राज्य के अभाव से अराजकता, अव्यवस्था, असुरक्षा और अशांति जन्म लेती है। इसलिए वह राज्य की उत्पति के आधार को समझौता मानते है। राज्य का उद्देश प्रजा की रक्षा एवं उनके कल्याण को सुनिश्चित करना है। राज्य के सात प्रमुख तत्व की तुलना वह शरीर के अंगों से करते है कौटिल्य के सप्तांग  राजा (सिर ) अमात्य (आंखे) जनपद (जांघ) दुर्ग (हाथ) कोश (मुख) दण्ड (मस्तिष्क) मित्र (कान) राजा कौटिल्य ने राजा को राज्य का सर्वोच्च अंग माना है। राजा का कर्तव्य राज्य की सुरक्षा एवं जनकल्याण करना है  राजा को विभिन्न विद्याओ से संपन्न, चरित्रवान, योग्य, दूरदर्शी और गुणवान होना चाहिए। अमात्य   अमात्य से आशय है मंत्री या प्रशासन के अधिकारियों से है राजा को योग्य अमात्य की नियुक्ति करनी चाहिए। राजा को कोई भी निर्णय अमात्य के परामर्श से लेना चाहिए। जनपद जनपद से आशय जनयुक्त भूमि से है। जनपद के ...

महात्मा गांधी और अंबेडकर के विचारों में अंतर और समानताएं को स्पष्ट कीजिए ?

महात्मा गांधी और अंबेडकर के विचारों में अंतर और समानताएं को स्पष्ट कीजिए ? महात्मा गांधी और बी. आर. अंबेडकर दोनों का साध्य तो एक था किंतु दोनों के अलग-अलग साधन थे। समानताएं दोनों ही महान विभूतियों ने दलितों के उत्थान के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए उनके प्रति समर्पित थे। दोनों ही कल्याणकारी एवं समानता परक समाज का निर्माण करना चाहते थे। दोनों ही स्त्री शिक्षा एवं विधवा पुनर्विवाह के समर्थक थे। अंतर गांधीजी वर्ण व्यवस्था का समर्थन करते थे। तथा वह इसे सामाजिक संगठन की स्वाभाविक नियम मानते थे। जबकि अंबेडकर जी  वर्ण व्यवस्था के घोर विरोधी थे। गांधी वर्ण व्यवस्था के अंतर्गत वंशानुगत व्यवसाय का भी समर्थक करते थे। क्योंकि यह अवस्था जीवन को जीने की राह सिखाती है। लेकिन अंबेडकर जी इसको स्वीकार नहीं करते तथा उन्होंने अपनी पुस्तक व्हू वेयर द शुद्राश में वर्ण व्यवस्था को अवैज्ञानिक, अव्यावहारिक एवं अन्यायपूर्ण बताया है। गांधीजी अस्पृश्यता निवारण के लिए सवर्णों तथा पूंजी पतियों का ह्रदय परिवर्तन को आवश्यक मानते है। जबकि अंबेडकर समाज में बदलाव के लिए संघर्ष को उचित मानते हैं। गांधीजी विकेंद्रीकृत लो...

ikta pratha in hindi इक्ता व्यवस्था

इक्ता व्यवस्था , इक्ता एक अरबी शब्द है, जिसका संबंध कृषि व्यवस्था से है। इक्ता भूमि, सैनिकों को वेतन के बदले आवंटित की जाती थी। इस व्यवस्था का शुरुआत मोहम्मद गोरी ने किया लेकिन इसका प्रभावी संस्थागत रूप से इल्तुतमिश ने अपनाया। इस व्यवस्था से कुलीन और अमीर वर्गों को आय प्राप्त होती थी।  इक्ता दो प्रकार की होती थी प्रथम इक्तेदार , इन इक्तेदार को जमीन का टुकड़ा उसकी सेवा के बदले दिया जाता था। दूसरे बड़े इक्तेदार   होते थे, यह उच्च कर्मचारियों को प्राप्त होता था इनको प्रशासनिक दायित्व भी होते थे तथा यह अपने क्षेत्र में शांति एवं व्यवस्था को बनाए रखते थे। इक्ता व्यवस्था के उद्देश्य सामंत शासन को समाप्त करना भूमि कर आसानी से एकत्र या वसूल करना राजस्व का एकत्रीकरण करना दूरस्थ क्षेत्रों पर नियंत्रण करना

doctrine of waiver in hindi अधित्याग का सिद्धांत क्या हैं

अधित्याग का सिद्धांत क्या हैं इस सिद्धांत के अनुसार भारत के उच्चतम न्यायालय ने कहा है, कि ज्यादातर लोग संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों जैसे मूल अधिकारों से परिचित या उनकी जानकारी व समझ नहीं हैं, इसलिए कोई भी व्यक्ति संविधान द्वारा दिए गए मूल अधिकारों को स्वेछा से परित्याग नहीं कर सकता क्योंकि अन्य व्यक्ति इसका दुरुपयोग भी कर सकते हैं इसी सिद्धांत को डॉक्टरिन ऑफ वेवर कहते हैं।